श्री मोकल मामा जी धाम
अरावली की ऊंची चोटी पर विराजमान, सबके रक्षक।
ऐतिहासिक गौरव
मोकलसर गांव और श्री मोकल मामा जी का इतिहास
मोकल जी ने 11 वर्ष तक यहां न्यायप्रिय शासन किया। उनके पश्चात उनके पुत्र रावत बीदा मोकलसर की गद्दी पर बैठे। रावत बीदा जी ने मेवाड़ महाराणा सांगा की रक्षार्थ सेवन्त्री गांव के रुपनारायण मन्दिर में अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। उनके इस अभूतपूर्व बलिदान के कारण ही आज भी उनका नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
विक्रम संवत 1678 में बालावत राठौड़ मोकलसर आए और तब से यह गांव बालावत राठौड़ों की जागीर रहा है। आज यह धाम समस्त भक्तों के लिए सुरक्षा, श्रद्धा और शक्ति का प्रतीक है।

पावन परंपराएं
श्रद्धा, विश्वास और अटूट भक्ति
मिट्टी के घोड़े
श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर मामा जी को सुंदर और रंगीन मिट्टी के घोड़े अर्पित करते हैं।
रक्षक देवता
मामा जी को गांव, पशुधन और भक्तों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। उनकी कृपा हर विपदा को हर लेती है।
पवित्र पदयात्रा
अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थित इस धाम की यात्रा भक्त बड़े हर्षोल्लास के साथ करते हैं।

आध्यात्मिक केंद्र - मोकलसर
मोकलसर गांव केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह गोडवाड़ क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र है। यहाँ आने वाला हर भक्त मामा जी की दिव्य ऊर्जा का अनुभव करता है।
धाम की व्यवस्था और भव्यता को बनाए रखने के लिए स्थानीय समुदाय और भक्तगण सदैव तत्पर रहते हैं, ताकि यहाँ आने वाले हर यात्री को सुखद और भक्तिमय अनुभव मिल सके।
दिव्य दर्शन के लिए पधारें
अरावली की वादियों में स्थित श्री मोकल मामा जी के दरबार में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। यहाँ आकर आप न केवल शांति पाएंगे, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति से भी जुड़ेंगे।
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